कोटपूतली/बहरोड़ । 7 साल पुराने चिकित्सीय मामले में उपभोक्ता निवारण कमीशन ने सुनाया बड़ा फैसला, कोटपूतली के संजीवनी अस्पताल से जुड़ा है मामला ।
राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण कमिशन ने एक ऐतिहासिक फैसले में इलाज करने वाले चिकित्सकों की लापरवाही मानने से इंकार किया है । वर्ष 2016 में कोटपुतली के संजीवनी अस्पताल से संबंधित इस मामले में प्रसूता ने एक प्रीमेच्योर बेबी को जन्म दिया था। इसी अस्पताल में नवजात को नवजात एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक मित्तल के निर्देशन में इलाज के लिए कुछ दिन भर्ती रखा गया था । अस्पताल से डिस्चार्ज के समय परिजनों क ROP के बारे में बताया गया था तथा उन्हें नेत्र रोग विशेषज्ञ से मिल कर स्क्रीनिंग की सलाह दी गई थी।
केस में डॉ. एस.एम. यादव एवं संजीवनी अस्पताल के अधिवक्ता अनुराग कुलश्रेष्ठ ने बताया कि नवजात बच्ची के परिजन उसे नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र यादव के पास लेकर गए लेकिन रेटीना जांच के लिए दोबारा अस्पताल नही आए,बाद में जब बच्ची को दृष्टि दोष हुआ तो AIIMS सहित कई बड़े संस्थानों में दिखाया जहां ग्रेड 5 रेटिनोपेथी की पुष्टि की गई ।
बच्ची के माता पिता ने इलाज करने वाले चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सत्तर लाख रुपए ले हर्जाने की मांग की थी। राज्य उपभोक्ता आयोग ने अपने निर्णय में दोनो पक्षों को सुनने के बाद माना की अस्पताल से डिस्चार्ज के समय एवं उसके बाद भी परिजनों को रेटिनोपैथी के बारे में स्पष्ट एवं लिखित सलाह दी गई थी इसलिए इस मामले में चिकित्सकों एवं अस्पताल की कोई लापरवाही नहीं है।
राज्य उपभोक्ता आयोग के इस निर्णय पर यूनाइटेड प्राईवेट क्लिनिक्स एंड हॉस्पिटल्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान के प्रदेश संयोजक डॉ. राज शेखर यादव ने संतोष व्यक्त किया ।उन्होंने कहा यह केस ROP के केसेस के लिए एक मिसाल साबित होगा।
"एक चिकित्सक अपने मरीज के उत्तम स्वास्थ्य के लिए भरसक प्रयास करता है किंतु कई बार इलाज के नतीजे आशा के अनुरूप नहीं रहते। ऐसे में चिकित्सकों को अदालतों में घसीटना एक गलत परिपाटी है। इस से अंततः समाज को ही नुकसान होता है क्योंकि अदालती कार्यवाही के भय से चिकित्सक गंभीर रोगियों के इलाज से कतराते हैं ।"- डॉ. राजशेखर यादव
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