DST के जवानों ने दलित युवक को जमीन पर पटक कर जानवरों की तरह पीटा, 22 घंटे तक किया टॉर्चर करने के बाद छोड़ा ।
बहरोड़ (संजय हिंदुस्तानी) । DST के जवानों ने दलित युवक को जमीन पर पटक कर जानवरों की तरह पीटा, 22 घंटे तक किया टॉर्चर करने के बाद छोड़ा ।
यह घटना कोटपूतली-बहरोड़ जिले के बहरोड़ कस्बे के सबलपुरा निवासी 25 वर्षीय दलित युवक की है । मामले में पीड़ित युवक अंकित मावर ने लिखित में पुलिस अधीक्षक वंदिता राणा को दी शिकायत में बताया कि 4 अप्रैल को करीब 8 बजे DST के पुलिसकर्मी संजय धनखड़ और कपिल शर्मा बिजली पावर हाउस के पास से किसी मामले में पूछताछ के नाम पर थाने में उठा कर ले आये । वहाँ पर थाने में इन दोनों पुलिसकर्मियों ने युवक को जमीन पर नीचे गिराकर कमर के नीचे जमकर फट्टे बरसाए, उसके हाथों पैरों पर जूते लेकर खड़े हो गए और उसे इतना पीटा की युवक से बैठा भी नहीं जा रहा । यही नहीं जातिसूचक शब्दों से प्रताड़ित किया, गालियां दीं। मारपीट के दौरान वे कह रहे थे कि अवैध कट्टा लेकर आओ। कहा- ऐसे केस में फंसाएंगे कि जमानत भी नहीं होगी। 22 घंटे के टॉर्चर के बाद युवक को 151 में जमानत दिलाकर 5 अप्रैल शुक्रवार को 6 बजे छोड़ा । शुक्रवार रात 8 बजे युवक जिला अस्पताल बहरोड़ पहुंचा,जहां मेडिकल करवाया।
खाली कागज पर साइन करवाए युवक का कहना है कि उसे शांति भंग की धाराओं में गिरफ्तार किया गया और खाली कागज पर साइन कराए गए। संजय और कपिल मुझे झूठे मामले में फंसाना चाहते हैं। ये पूर्व विधायक बलजीत यादव के आदमी हैं। इन्होंने मुझसे पहले भी कहा था कि या तो बलजीत को वोट देना नहीं तो हम तुझे झूठे मुकदमे में फंसा देंगे। 6 अप्रैल शनिवार शाम को मामला मीडिया की संज्ञान में आया और मामले को बढ़ता देखकर पुलिस अधीक्षक ने दोनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया । हमारे पास कुछ ऐसे फोटो जिसे आमजन को दिखा नहीं सकते । गौरतलब है सिपाही संजय धनखड़ पहले भी नीमराना में दूध माफिया के साथ संबंधों के चलते सस्पेंड हो चुका है और उसे लंबे समय तक डीएसटी से हटा दिया गया था ।
"मैंने किसी को नहीं बुलाया, आज मामला मेरे संज्ञान में आया है। मैंने किसी को भी थाने नहीं बुलाया था। कौन लेकर आया-क्यों लेकर आया, इसकी एसएचओ से जानकारी ले रहा हूं। सिपाही संजय धनखड़ और कपिल लंबे समय से डीएसटी में पदस्थापित थे।" कृष्ण यादव, पुलिस उपाधीक्षक, बहरोड़
मामले की जाँच करेंगी एडिशनल एस.पी. नीमराणा ।
पुलिस अधीक्षक वंदिता राणा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जाँच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीमराणा शालिनी राज को सौंपी है ।
इनपुट - मामले में डीएसपी को फंसाने की तैयार की जा रही जमीन ।
कस्बे की स्थानीय राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई के चलते इस मामले में भाजपा के एक युवा नेता द्वारा बहरोड डीएसपी को भी लपेटने का प्रयास किया जा रहा है । गौरतलब है सत्ता के केंद्रीकरण को लेकर आपस मे गुटबाजी चल रही है जिसमे दोनों पक्ष अंदरूनी तौर पर एक दूसरे को नीचा दिखाने के अवसर की तलाश में हैं । इसी युवा नेता के कहने पर युवक द्वारा मीडिया को और बयान देने से मना किया गया है । सूत्रों के अनुसार कुछ दिन पहले कस्बे से अवांछित गतिविधियों में पकड़े युवकों की सिफारिश न मानने से ही यह युवा नेता नाराज चल रहे हैं और अब मिले इस मौके को भुनाने का प्रयास कर रहे हैं । गौरतलब है कि क्षेत्र में बेवजह सिफारिश न मानने के चलते हाल ही पदस्थापित अफसरों की क्षेत्र के लोगों में चर्चा हो रही है । आपको बता दें बहरोड़ डीएसपी कृष्ण यादव की यह पहली पोस्टिंग है ऐसे में वह बिना दबाव व पक्षपात के कानून व्यवस्था को बनाने का सम्भव प्रयास कर रहे हैं और जनता इनकी कार्यशैली की प्रशंसा भी कर रही है ।
डीएसटी के जवानों को नहीं देना चाहिए एकदम फ्री हैंड, लंबे समय से जमे जवानों की हरकतों पर होनी चाहिए पारदर्शी मोनिटरिंग, कुछ ऐसे हो सकते हैं नियम ताकि डीएसटी से पुलिस की छवि पर न लग सके कोई दाग :-
• छपास से बचें - इनका कार्य आमजन के बीच जाकर गंभीर मामलों की जानकारी लाना होता है ,डिजिटल या प्रिंट मीडिया से लोग इनके चेहरे को पहचान लेते हैं और ऐसे में गंभीर मामलों की जानकारी मिलने की संभावना कम हो जाती है ।
• ड्रेस कोड - जब यह किसी मामले की छानबीन करने के अभियान पर हों तब कुछ भी ड्रेसकोड पहनें लेकिन जब यह थाने में या इसके आस पास हों तो अपनी निर्धारित वर्दी में रहें ताकि थाने में तैनात पुलिसकर्मीयों के अंदर हीनभावना न आने पाए क्योंकि वह सदैव वर्दी में रहते हैं ।
• हरकतों पर नजर - ज्यादा समय एक जगह पदस्थापित रहने पर इनके कार्य में अपारदर्शीता आ जाती है और मिलीभगत से भ्रष्टाचार होने के पूरे चांस रहते हैं क्योंकि इनके पास जिम्मेदारी गंभीर मामलों को सुलझाने की रहती है । गंभीर मामलों में दोषी लोगों को गिरफ्तार न करने के नाम पर वसूली की चर्चा भी होती रहती है । ऐसे में समय समय पर सक्षम अधिकारी द्वारा इनकी मोनिटरिंग की जाती रहनी चाहिए ।
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