आखिर कैसे बचाएं मैली होती पत्रकारिता को ...कैसी होनी चाहिए पत्रकारिता
*पत्रकारिता शिक्षित व सात्विक कर्म प्रधानता* के स्थान पर 🤔
*अनपढ़ व अनैतिक कार्यो से जुड़े लोगों का अड्डा बनती* जा रही है🧐जो पत्रकारिता की धौंस दिखा कर उगाही करते हैं
*मतलब !* आज जो मीडिया की कलम उठाये *सवाल पूछ रहे है ! उन्होंने सम्भवतः 10वी 12 वी परीक्षा के प्रश्न पत्रों के कभी जवाब दिये हो तो, बड़ी बात है 😂*लेकिन सेटिंग करने में PHD वालो से भी माहिर,दलाली एक नंबर की करते हैं
*आखिर कैसे बचाएं मैली होती पत्रकारिता को ....*
*"क्या है पत्रकारिता.....और यह कैसे बचे ताकि कुछ दलालों की वजह से लोकतंत्र के इस चौथे स्तंभ पर लोग अंगुली नहीं उठाएं ??"*
पत्रकारिता न तो व्यवसाय है और न ही यह ब्लैकमेलिंग का औजार है और यह निरीह प्राणियों,समाज के प्रतिष्ठित, *ईमानदार अधिकारियों की नींद हराम करने* का माध्यम तो बिल्कुल भी नहीं है ।
पत्रकारिता किसी अपराधी,चोर,भ्रस्ट, दलाल, ब्लैकमेलर,चरित्रहीन माफियाओं द्वारा हमारी संस्कृति का नाश करने का प्रचार तंत्र नहीं अपितु यह न केवल हमारी वरन संसार की अमूल्य धरोहर है।
आज किसी को विरासत में तो किसी को कोई काम न मिला तो *कुछ लोग* दलाली के लिए पत्रकारिता ?
अवैध काम करने या करवाने वाले होटलों से मंथली या दारू लेना या सेवा लेना यदि नहीं हो ऐसा तो उस होटल को बदनाम करना, क्या यह है पत्रकारिता ??
किसी भी एक्सीडेंटल मौत पर पार्टी से पैसों के लिए समझौता करना वरना *खबर लगा देंगे* की धमकी देना, क्या यह है पत्रकारिता ??
*किसी अफसर/व्यावसायी/ पुलिस अधिकारी/ शराब ठेकेदार/ परिवहन विभाग* ने इनको और इनकी दलाली को स्वीकार कर लिया तब तो सब *पाक साफ* लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो दलाली के लिए उसके पीछे पड़कर उसे बदनाम करना क्या यह है पत्रकारिता ??
खुद होटल में जाकर दारू पी अय्याशी करना और फिर बडे पुलिस अधिकारियों से *होटलों के अवैध धंधे* पर सवाल पूछ खुद को शराफत का "सर्टिफिकेट देना" , क्या यह है पत्रकारिता ??
जो काबू में आया ठीक, नही तो उसे *छाप देंगे* का डर दिखा दुश्मनी निकालना क्या यह है पत्रकारिता ??
जो कॉलोनी इनको हिस्सा दे दे वह पाक साफ जहाँ इन्हें कुछ न मिले वह अवैध ,अवैध वसूली करना है क्या पत्रकारिता ??
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दलाली, वसूली,ब्लैकमेलिंग, अय्याशी कर बदनाम करना है क्या पत्रकारिता ??
नशेड़ी,भंगेड़ी, अय्याश, ब्लैकमेलरों का आखिर क्यों अड्डा बन रहा है पत्रकारिता ??
कुछ भेड़ियों के कारण भगवान नारद की पवित्र गंगा (पत्रकारिता) इन दिनों मैली हो रही है भेड़ियों के सिर उठाने से वास्तविक पत्रकारिता का सिर निश्चित रूप से नीचे होने लगा है ।
पत्रकारिता मनीषियों, ऋषियों के जमाने से चला आ रहा एक पवित्र मिशन है ।
यह एक तऱीके से ही बंद हो सकता है यदि आप लोग *झूठ खरीदना बंद कर दें* ।
*दूसरा* अधिकारी,नेता खुद से सवाल पूछने वाले तथाकथित पत्रकारों से सिर्फ यह सवाल करें कि आपकी योग्यता क्या है ?
इसके बाद भी यदि आप झूठ खरीदते हैं तो मान लो *जो दिख और दिखाया जा रहा है आपको वह आपको पसंद है और सच देखने की आपकी इच्छा खत्म हो चुकी है ।*
*बस आप झूठ खरीदना बन्द कर दें खुद आत्मसमर्पण कर देंगे खुद को भगवान समझने वाले पत्रकार ।*
*जय हिंद जय भारत*
🙏🙏
बहुत ही सटीक
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