क्रिकेट में खेल के साथ किस्मत का भी अहम रोल ।
क्रिकेट के खेल में प्रतिभा के साथ ही किस्मत का भी बड़ा रोल रहता है. कभी कभी एक खिलाड़ी को चोट लगती है और दूसरे को मौका मिलता है. फिर वो उस मौके का फायदा इतना अच्छे तरीके से उठा लेता है कि जिसकी जगह आया था उसकी ही जगह खतरे में पड़ जाती है. कहां गए वो लोग में आज जिस खिलाड़ी की बात हो रही है उसकी कहानी भी ऐसी ही है. वीरेंद्र सहवाग की चोट लगने पर सौरव गांगुली ने इसे ओपनर बनाया और फिर उसने धमाकेदार शतक ठोक दिया. इस शतक का असर ऐसा रहा कि वह 2003 का वर्ल्ड कप भी खेल गया. हालांकि फिर कभी टीम इंडिया के लिए शतक नहीं लगा पाया. लेकिन अपने छोटे से करियर में यह खिलाड़ी कई ऐतिहासिक कारनामे कर गया. इस खिलाड़ी का नाम दिनेश मोंगिया (Dinesh Mongia) है.
5 फीट 10 इंच लंबे दिनेश मोंगिया ने भारत के लिए 57 वनडे मुकाबले खेले थे. लेकिन उनके इंटरनेशनल करियर को केवल एक पारी की वजह से याद किया जाता है. यह पारी 159 रन की थी जो उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ गुवाहाटी में खेली थी. इसी पारी के दम पर वे काफी समय तक टीम इंडिया में जमे रहे लेकिन दोबारा कभी शतक नहीं बना सके. दिनेश मोंगिया ने ओपनिंग करते हुए 147 गेंद पर 17 चौकों और एक छक्के की मदद से नाबाद 159 रन बनाए थे. यह उस समय भारत के लिए वनडे में चौथी ही सबसे बड़ी शतकीय पारी थी. मोंगिया से बड़ी शतकीय पारी 1999 में सचिन तेंदुलकर (186), 1999 में सौरव गांगुली (183) और 1983 में कपिल देव (175) ने ही खेली थी.
लेकिन ओपन करने का मौका उन्हें किस्मत से मिला था. दरअसल 2002 की जिम्बाब्वे के खिलाफ सीरीज से पहले वीरेंद्र सहवाग का कंधा चोटिल हो गया था. ऐसे में सौरव गांगुली के सामने दूसरे ओपनर की समस्या खड़ी हो गई. तब गांगुली ने मोंगिया को ओपन में अपने साथ मौका दिया. उन्हें यह चांस मिलने में अनिल कुम्बले का भी अहम योगदान था. जिम्बाब्वे सीरीज से पहले चैलेंजर ट्रॉफी में मोंगिया,अनिल कुम्बले की टीम का हिस्सा थे. तब कुम्बले ने उन्हें सलामी बल्लेबाज के रूप में आजमाया था. तब भी उन्होंने शतक लगाया था. इससे प्रभावित होकर कुम्बले ने दिनेश मोंगिया को सराहा था. इस वजह से भी गांगुली ने उन्हें ओपनिंग के लिए चुना. मोंगिया ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 28 मार्च 2001 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कदम रखा था. लेकिन पहचान में वे नाबाद 159 रन की पारी से ही आए.
उन्होंने भारत के लिए 57 वनडे खेलने के अलावा एक टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेला. वनडे क्रिकेट में उन्होंने 27.95 की औसत से 1230 रन बनाए. इसमें एक शतक और 4 अर्धशतक शामिल रहे. साथ ही बाएं हाथ की फिरकी गेंदबाजी से 14 विकेट भी लिए. वहीं इकलौते टी20 मैच में उन्होंने 38 रन की पारी खेली.
मोंगिया के बारे में एक दिलचस्प तथ्य ये भी है कि वो टी20 मैच खेलने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी हैं. उन्हें साल 2004 में इंग्लैंड के काउंटी क्लब लंकाशायर ने अनुबंधित किया था. तब विदेशी खिलाड़ी के तौर पर चोटिल हुए ऑस्ट्रेलिया के स्टुअर्ट लॉ की जगह मोंगिया का चयन हुआ था. बाद में वे भारत के पहले टी20 मुकाबले में भी खेले थे. इसके अलावा एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी उनके नाम दर्ज है. साल 2006 में डीएलएफ कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कुआलालंपुर में स्टुअर्ट क्लार्क की गेंद पर चौके के साथ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय वनडे मैचों में 10 लाख वां रन बनाया था.
दिनेश मोंगिया साल 2007 में आखिरी बार भारत के लिए खेले. इसके बाद उनकी टीम से छुट्टी हो गई. फिर वे बीसीसीआई की बगावती इंडियन क्रिकेट लीग में शामिल हो गए. इसके चलते वे बैन कर दिए गए. इंडियन क्रिकेट लीग में खेलने के दौरान उन पर सट्टेबाजों की मदद के आरोप भी लगे. मोंगिया ने इन आरोपों से इनकार किया. हालांकि अक्टूबर 2008 में बीसीसीआई ने बैन हटा दिया लेकिन मोंगिया दोबारा किसी भी फॉर्मेट में क्रिकेट नहीं खेल पाए. साल 2019 में उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कहा.
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