राजस्थान में ऑर्गन ट्रांसप्लांट प्रकरण में मंत्री के क्लीन चिट देने के बाद डॉक्टर्स के इस्तीफे के मायने ..
राजस्थान । चिकित्सा मंत्री खींवसर एसएमएस अस्पताल में बैक पेन का इलाज कराने गए थे या फिर दोषी डॉक्टरों को इस्तीफे के लिए मनाने?
ऑर्गन ट्रांसप्लांट प्रकरण में मंत्री के क्लीन चिट देने के बाद डॉक्टरों के इस्तीफे क्या मायने रखते हैं।
डॉक्टर सुधीर भंडारी को तो अशोक गहलोत अपने राज्य में ही ओब्लाइज कर गए।
राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने 6 मई को पत्रकारों को बताया कि देश के बहुचर्चित ऑर्गन ट्रांसप्लांट के मामले में जयपुर स्थित सरकारी एसएमएस अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. राजीव बगरहट्टा और अधीक्षक डॉक्टर अचल शर्मा ने इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं। खींवसर ने इसे अपनी बड़ी उपलब्धि बताया कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट के मामले में दो बड़े चिकित्सकों का इस्तीफा हो गया है। इससे पहले 2 मई को खींवसर अपने शरीर के बैक पेन का इलाज कराने के लिए एसएमएस अस्पताल गए थे। कोई एक घंटा अस्पताल में रहने के बाद मंत्री का बैक पेन खत्म हुआ या नहीं, ये तो वहीं जाने, लेकिन अस्पताल से बाहर निकलने पर मंत्री ने कहा था कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट में एसएमएस अस्पताल के चिकित्सकों का कोई दोष नहीं है। खींवसर ने उदाहरण देते हुए कहा कि पासपोर्ट विभाग के कार्मिक फर्जी पासपोर्ट जारी कर दे तो विभाग के अधिकारी का क्या दोष है? मालूम हो कि एसएमएस अस्पताल में बनी चिकित्सकों की कमेटी की अनुमति के बाद ही ट्रांसप्लांट से डोनर और रिसीवर को एनओसी जारी होती है। जांच एजेंसियों की कार्यवाही बताती है कि एसएमएस अस्पताल से जारी फर्जी एनओसी से जयपुर के फोर्टिस और ईएचसीसी जैसे बड़े अस्पतालों में ऑर्गन ट्रांसप्लांट हो गए। इस पूरे मामले में एसएमएस अस्पताल के जिम्मेदार चिकित्सक संदेह के घेरे में है। सवाल उठता है कि 2 मई को मंत्री खींवसर बैक पेन का इलाज कराने गए थे या फिर अस्पताल के चिकित्सकों को इस्तीफे के लिए मनाने? मंत्री के अस्पताल के दौरे के बाद ही दो बड़े चिकित्सकों के इस्तीफे हुए हैं। सवाल यह भी है कि क्या इस्तीफे दे देने के बाद चिकित्सक ऑर्गन ट्रांसप्लांट प्रकरण में दोष मुक्त हो जाएंगे? क्या चिकित्सकों के इस्तीफे बचाने के लिए ही कराए गए हैं? जांच एजेंसियों का मानना है कि जब एक हजार से भी ज्यादा फर्जी एनओसी से जयपुर के बड़े अस्पतालों में धड़ल्ले से ऑर्गन ट्रांसप्लांट हो रहे हो, तब एसएमएस अस्पताल के चिकित्सकों की जानकारी न हो, ऐसा नहीं हो सकता।
डॉक्टर भंडारी पहले ही ओब्लाइज:
अशोक गहलोत ने कांग्रेस शासन के मुख्यमंत्री रहते हुए वर्ष 2022 में जयपुर के सरकारी एसएमएस अस्पताल में हार्ट की एंजियोप्लास्टी करवाई थी, तब डॉ. सुधीर भंडारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के प्रिंसिपल थे, तब डॉक्टर भंडारी ने गहलोत की जो सेवा चाकरी की उसे देखते हुए गहलोत ने डॉ. भंडारी को आरयूएचएस का वाइस चांसलर बना दिया यानी डॉ. भंडारी तो गहलोत से ही ओब्लाइज हो चुके हैं। ऑर्गन ट्रांसप्लांट के प्रकरण में डॉ. भंडारी की भूमिका को भी संदिग्ध माना जा रहा है। चिकित्सा मंत्री खींवसर चाहते हैं कि डॉ. भंडारी भी वाइस चांसलर के पद से इस्तीफा दे दें लेकिन फिलहाल डॉ. भंडारी ने इस्तीफा देने से इंकार कर दिया है। यदि डॉ. राजीव बगरहट्टा और डॉ. अचल शर्मा इस्तीफा नहीं देते तो सरकार इन्हें हटाने का अधिकार रखती है। लेकिन डॉ. भंडारी आरयूएचएस के वीसी है, इसलिए उन्हें हटाने का अधिकार राज्यपाल के पास है। यही वजह है कि अब राज्य सरकार डाँ. भंडारी को हटाने के लिए राज्यपाल कलराज मिश्र को एक विस्तृत रिपोर्ट भेज रही है। डॉ. भंडारी के दामन पर दाग लगे इससे पहले ही हो सकता है कि डॉ भंडारी इस्तीफा दे दें।
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