महर्षि वाल्मीकि खुद एक जीता जागता ग्रंथ हैं, आज जयंती पर विशेष ।
महर्षि वाल्मीकि जी का जीवन एक नही अपितु अनेक सीखों से भरा हुआ है। संत के सानिध्य से एक भील का जीवन कैसे भला जीवन बन जाता है महर्षि वाल्मीकि का जीवन इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।
पाप की कमाई खाने का हक़दार भले ही पूरा परिवार क्यों न हो मगर पाप का फल पाप करने वाले को ही भोगना पड़ता है।
पाप की कमाई अवश्य बांटी जा सकती है मगर पाप का फल नही। दुनियाँ को लूटने की वृत्ति से दुनियाँ को लुटाने की वृत्ति का उदय होना यह एक सच्चे संत के अल्प संग का ही प्रभाव है।
महर्षि वाल्मीकि केवल इसलिए नही पूजे जाते कि उन्होंने रामायण जैसा ग्रंथ लिखा अपितु इसलिए भी पूजे जाते है कि उन्होंने अपनी वृत्तियो में समाये रावण जैसे अ सुर का नाश किया।
"सत्यमेवेश्वरो लोके सत्ये धर्मः सदाश्रितः।
सत्यमूलनि सर्वाणि सत्यान्नास्ति परं पदम् ।"
रामायण महाकाव्य के रचयिता, संस्कृत भाषा के आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जयंती पर उन्हें चरण वंदन।
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