जिला कलेक्टर ने दिखायी संवेदनशीलता , मिट्टी के दीपक बेचने वाले ग्रामीणों को किसी भी प्रकार की असुविधा ना होने के दिये निर्देश ।

कोटपूतली-बहरोड़ । दीपावली पर्व पर जिले में कुम्हार, ग्रामीणों एवं राजीविका समूहों द्वारा मिट्टी तथा गोमय (गोबर) के दीपक तैयार कर विक्रय के लिए स्थानीय बाजारों लेकर आते हैं। मिट्टी, गोमय (गोबर) के दिये  के विक्रय को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से कलेक्टर कल्पना अग्रवाल ने आदेश जारी किया है। 

जारी आदेश में कलेक्टर ने एस.डी.एम, तहसीलदार एवं नगर परिषद/नगर पालिका ईओ  को निर्देशित किया है कि जिले के समस्त नगरपालिका/नगरपरिषद क्षेत्र के बाजार में मिट्टी, गोमय के दीपक विक्रय के लिए आने वाले ग्रामीण विक्रेताओं से किसी भी प्रकार की कर वसूली न की जाए तथा साथ ही मिट्टी तथा गोमेय के दिये के उपयोग के लिए नागरिकों को भी प्रोत्साहित करे। बाजार में मिट्टी तथा गोमय दीपक  बेंचने के लिए आने वाले लोगो को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। यह सुनिश्चित किए जाए।

गोमय दीपकों से नहीं होता है प्रदूषण ।

 "राजीविका समूहों द्वारा हाथ से बने यह दीपक सरसों का तेल और रूई की बाती से जलाने हैं। बाती के साथ-साथ यह दीया भी थोड़ा-थोड़ा जल जाता है, पांच-छह दिनों के बाद अर्थात दीपावली समाप्त होने पर कपूर का उपयोग कर घर में ही यह दीए पूरी तरह से जला देने हैं। जहां दीया जल कर नष्ट हो जाएगा और हवा भी शुद्ध हो जाएगी। हवा तो शुद्ध होती ही है इसी के साथ दीए के कोई अवशेष भी नहीं बचते हैं। यह दीया प्रकृति में ही समा जाता है और प्रदूषण भी नहीं होता है।"- कल्पना अग्रवाल,जिला कलेक्टर, कोटपूतली बहरोड़

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