जातिवाद नए भारत की सबसे बड़ी समस्या है ...सरकारी जॉब्स से रिटायर होने के बाद वाले लोगों को जातिवाद क्यों समझ में ज्यादा आता है ....!!

बहरोड़ । कल बहरोड़ में कुछ कट्टर जातिवादी लोगों ने मनुस्मृति की कॉपी जलाई, क्यों ...!!

मर्द मान लेंगे असली यदि वही लोग *कुरान या बाइबल* की बुक जला देंगे ...
इनमे भी कुछ रिटायरमेंट के बाद पागल हुए सरकारी टीचर और सरकारी कर्मी हैं ....... अब जाकर इनका असली रूप दिख रहा कि

*," स्कूल समय पर जातिवाद के खिलाफ पढ़ाने वाले तो खुद जातिवाद करते थे ।"* 

क्या इनके यह जलाने से समाज एक होगा ..?

आज कोई भी जातिवाद नहीं करता है लेकिन ऐसे लोग समाज को लड़ाने का प्रयास क्यों करते हैं ..?

मानते हैं पहले सामाजिक ढाँचा था ऐसा जिसमें होता था जातिवाद लेकिन अब ....

यह नया भारत है युवाओं का , सबसे ज्यादा युवा आज भारत में है 
आज भारत विश्व में चिकित्सा, शिक्षा, विज्ञान, योगा, आयुर्वेद, ऑटोमोबाइल सहित लगभग हर क्षेत्र में अपना डंका बजा रहा है तो .... 

खुद कमाकर बच्चों के लिए पैसा जोड़ चुके तुच्छ सोच वाले लोग युवाओं को बरगलाकर *उन्हें भड़काकर* समाज मे गंदगी फैलाने का कार्य कर रहे हैं ....

निवेदन है युवाओं से यह लोग कमा चुके हैं और आपको समाज से अलग करने का कार्य कर रहे हैं ....


*जरा सोचना आपके यह 10 लोग काम आएंगे या आपके स्कूल या बचपन के दोस्त जिन्होंने कभी आपसे जातिवाद नहीं किया था .....!!!!*

जातिवाद करने वालों को यह संदेश देना उचित होगा:

"जातिवाद एक ऐसी सोच है जो हमारे समाज को कमजोर बनाती है। यह हमें एक दूसरे से अलग करती है और हमारे बीच में दीवारें खड़ी करती है।

हमें यह समझना चाहिए कि हर व्यक्ति का मूल्य उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसके कर्मों और व्यक्तित्व से तय होता है।

आइए हम जातिवाद की इस सोच को त्यागें और एक दूसरे को सम्मान और प्यार से देखें। हमारा लक्ष्य एक समृद्ध और सशक्त समाज बनाना होना चाहिए, जहां हर व्यक्ति को समान अधिकार और अवसर मिलें।"

"जातिवाद एक ऐसी बीमारी है जो हमारे समाज को खोखला कर देती है। यह हमें एक दूसरे के खिलाफ खड़ा करती है और हमारे बीच में विभाजन पैदा करती है।

आइए हम जातिवाद की इस सोच को त्यागें और एक दूसरे को सम्मान और प्यार से देखें। हमारा लक्ष्य एक समृद्ध और सशक्त समाज बनाना होना चाहिए, जहां हर व्यक्ति को समान अधिकार और अवसर मिलें।

जातिवाद का कोई आधार नहीं है, यह सिर्फ एक मानसिक सोच है। आइए हम इस सोच को बदलें और एक नए समाज का निर्माण करें, जहां हर व्यक्ति को सम्मान और समानता मिले।"

संजय हिंदुस्तानी,
जर्नलिस्ट एन्ड ब्लॉगर

Comments

Popular posts from this blog

प्यार, जासूसी और धोखा का परिणाम है लव जिहाद, जानिए कैसे फंसी इस जाल में ज्योति मल्होत्रा और उससे पहले IFS ऑफिसर माधुरी गुप्ता...?

बहरोड़ SDM के रीडर को 70 हजार की रिश्वत लेते ACB ने रंगे हाथों किया गिरफ्तार, SDM रामकिशोर मीणा के लिए ली थी राशि।

ऊँटोली के द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर में नींव करौरी बाबा के मंदिर का मनाया स्थापना दिवस, अर्पण सेवा फाउंडेशन बहरोड द्वारा मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं व ग्रामवासियों के लिए बैठने के लिए भेंट की 10 सीमेंटेड चेयर।