धुंध और भयंकर सर्दी में सरकारी और कलेक्टर के आदेश के बावजूद खुलते स्कूल और हादसों पर आखिर कब लगेगी रोक, एक बच्चे की बहरोड़ में हुई हादसे में मौत ...

धुंध में अपने बच्चों को स्कूल भेजने वाले पैरेंट्स भी हैं ऐसी *दुर्घटनाओं* के लिए जिम्मेदार ।
अरे .......!!!!

जरा सोचो जिस धुंध और ठंड में आप और हम बाहर नहीं निकल सकते उसमें आपके छोटे बच्चे स्कूल पढ़ रहे हैं ...!!!

क्या वास्तव में *छोटे बच्चों* की पढ़ाई इतनी टफ है ...!!

आप मानें या न मानें लेकिन आजकल की 70% मॉडर्न माएँ सिर्फ *मोबाइल या रील्स या नेट सर्फिंग* के लिए बच्चों को भेजती हैं स्कूल छुट्टी के बावजूद ...

जरा सोचें .... आजकल 1-2 बच्चों का जमाना है , क्या बीतती होगी उन पैरेंट्स पर जिनके साथ ऐसे हादसे होते हैं और यह आपके और हमारे साथ भी हो सकते हैं ...!!

क्या सरकारी डिपार्टमेंट या प्रशासन बेवकूफ है जो *मौसम के अनुसार* छुट्टी के आदेश जारी कर रहा है ...!!

*अंत में ....*  

अपने बच्चों की जिम्मेदारी हमारी है ... दुर्घटना के बाद स्कूल, प्रशासन और नेता सिर्फ शोक जताने या 5-10 मिनट की सांत्वना देने आएंगे 

और 

आपको मिलेगा  *जीवन भर का दंश ।*

सोच लें *मॉडर्न पेरेंट्स* क्या चाहिए इनमें से ....!!!

संजय हिंदुस्तानी,
जर्नलिस्ट एन्ड ब्लॉगर

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