बहरोड़ में यह कैसा पर्यावरण संरक्षण..? हरी लकड़ी से भरी यह बोगी पत्रकार को दिख रहीं लेकिन प्रशासन को क्यों नहीं दिखाई देती...
राजस्थान सरकार पौधारोपण का अभियान चलाकर प्रदेश को हराभरा करने का प्रयास कर रही है। वहीं सीकर के अजीतगढ़ में हरे पेड़ों की कटाई और परिवहन खुलेआम हो रहा है। मजेदार बात यह है कि वन विभाग की चौकी के सामने से गुजरते हरे पेड़ को ले जाते वाहन किसी को नजर नहीं आते। इतना ही नहीं परिवहन विभाग की ओर से लगाए गए सीसीटीवी में सबकुछ कैद है इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही। माना जा रहा है कि करीब एक लाख रुपए से अधिक का अवैध लकड़ी का कारोबार अजीतगढ़ में ही हो रहा है।
ग्रामीण इलाकों में हरे पेड़ों की अवैध कटाई का माफिया जड़ें जमा चुका है इससे रोजाना क्षेत्र में सैकड़ों पेड़ काटे जा रहे है। दिनभर में पेड़ों की कटाई के बाद शाम ढलते ही ट्रेक्टर-ट्रालियों में भर कर गिली लकडियों का परिवहन करते है। माफिया अजीतगढ़, दिवराला, गढकनेत, झाड़ली, सीपुर, मानगढ़, जुगराजपुरा, सिहोड़ी, हथौरा, पीथलपुर, मण्डूस्या, मौद्याडी, जगदीशपुरी, अमरसर इलाकों में पेड़ो की वन, चारागाह के अलावा अधिकांश खातेदारी भूमियों से थोई इलाके में आरा मशीनों पर ले जाते है।
बता दे कि वन विभाग ने सालों पहले लाखों की लागत से मण्डूस्या रोड़ स्थित सांई मंदिर के पास वनपाल कार्यालय में आवास बनाया था। वर्तमान में यहां पर एक वनपाल और कार्मिकों समेत कुल 4 वन अधिकारी और कर्मचारी तैनात रहते है। अजीतगढ़ से होकर रोजाना लकड़ियों के भरे ट्रेक्टर-ट्रॉली गुजरने के मामले में ग्रामीणों की शिकायत के बाद कुछेक कार्रवाई करके इतिश्री कर ली।
लेकिन कर्मचारी निगरानी करके सख्ताई से कोई कार्रवाई नहीं करते है। गांव वालों का आरोप है कि वनपाल नाके के सामने से ट्रेक्टर-ट्राली में गीली लकडियां भरकर ले जाते है लेकिन इसके बादq
Comments
Post a Comment