"ईमित्र संचालक फीस के लालच अपात्र अभ्यर्थियों के फार्म भरना बंद करें इससे RPSC का समय और श्रम होता है व्यर्थ अन्यथा ऐसे संचालकों के विरुद्ध होगी कार्रवाई।" - रामनिवास मेहता, सचिव, RPSC
जयपुर। RPSC के सचिव रामनिवास मेहता ने एक प्रेस नोट जारी कर बताया की आयोग को यह ज्ञात हुआ है कि कई ई-मित्र संचालक अनेक भर्ती विज्ञापनों के तहत ऐसे अभ्यर्थियों के आवेदन पत्र भी भर देते हैं जिनकी अभ्यर्थी योग्यता तक नहीं रखते हैं। ई-मित्र संचालक अभ्यर्थियों को आगे बढ़कर कहते हैं कि अमुक पद का विज्ञापन भी आयोग द्वारा जारी किया गया है अतः यह फार्म भी भर देता हूं।
अधिकांश अभ्यर्थियों को यह तक ज्ञात नहीं होता है कि वह उक्त पद के लिए योग्यता रखता है अथवा नहीं ? अनेक ई-मित्र संचालक अभ्यर्थियों को भ्रमित कर अन्य फार्म भरने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे पद की योग्यता नहीं रखने वाले अभ्यर्थी द्वारा भी आवेदन कर दिये जाने से आवेदकों की संख्या बहुत अधिक हो जाती है एवं ऐसे अभ्यर्थी बाद में परीक्षा में सम्मिलित भी नहीं होते हैं। दूसरी ओर आयोग को प्राप्त आवेदनों की संख्या के आधार पर ही आयोग को परीक्षा सर्वधी समस्त व्यवस्थाएं करनी होती है जिससे अनावश्यक श्रम एवं समय नष्ट होता है।
इस हेतु सभी ई-मित्र संचालकों को आगाह किया जाता है कि वे किसी भी अभ्यर्थी को भ्रमित कर अनावश्यक फार्म भरने के लिए नहीं उकसाये। साथ ही अभ्यर्थियों को आगाह किया जाता है कि जिस पद के लिए योग्यता रखते हैं उसी पद हेतु आवेदन करें। यदि कोई ई-मित्र संचालक ऐसा करते हुए पाया जाएगा तो सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग को उसका लाइसैंस निरस्त करने हेतु लिखा जाएगा।
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