ट्रंप का पुतिन के सामने सरेंडर, हर ताकतवर व्यक्ति से डरते हैं ट्रम्प, हमें देश के मुद्दे पर देना चाहिए प्रधानमंत्री मोदी का साथ क्योंकि मोदी ने स्पष्ट कहा, " टैरिफ़ के मुद्दे पर ट्रम्प के आगे भारत नहीं झुकेगा। "
अलास्का, USA। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 16 अगस्त को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात अमेरिका के अलास्का में हुई। दुनिया खासकर यूरोप के देश इस बैठक पर नजर लगाए हुए थे। दुनिया को उम्मीद थी कि ट्रंप अपनी ताकत का इस्तेमाल कर रूस से यूक्रेन को राहत दिलवाएंगे।
रूस के हमलों से यूक्रेन बुरी तरह जख्मी है लेकिन बैठक में ट्रंप ने पुतिन पर कोई दबाव बनाने के बजाए अमेरिका का सरेंडर करवा दिया। बंद कमरे में हुई बैठक के बाद ट्रंप ने कहा कि रूस की ताकत को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। मैंने और पुतिन ने अच्छे माहौल में वार्ता की है लेकिन अब गेंद यूक्रेन और यूरोप के देशों के पाले में है। डोनाल्ड ट्रंप के बयान से जाहिर है कि वार्ता में अमेरिका ने रूस पर युद्ध समाप्ति के लिए कोई दबाव नहीं बनाया। ट्रंप ने यह भी नहीं बताया कि आखिर बैठक में यूक्रेन को लेकर क्या बात हुई। अलबत्ता पुतिन के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया कि अगली बैठक मास्को में होगी। बैठक में पुतिन ने दो टूक शब्दों में कहा कि यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के निर्णय से पहले युद्ध के कारणों को समाप्त करना होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यूरोप के देशों को यूक्रेन से दूर रहना होगा यानी पुतिन ने स्पष्ट कहा कि जब तक यूरोप के देश यूक्रेन की मदद करते रहेंगे तब तक रूस यूक्रेन पर हमला करता रहेगा।
कहा जा सकता है कि ट्रंप और पुतिन के बीच हुई मुलाकात का कोई निष्कर्ष नहीं निकला है। यूक्रेन को राहत दिलवाने के बजाए ट्रंप ने पुतिन के सामने सरेंडर कर दिया है। विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि एक दिन ऐसे ही डोनाल्ड ट्रंप भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने सरेंडर करेंगे। ट्रंप ने हाल ही में भारतीय उत्पादों पर जो 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाया है उसके पीछे रूस से तेल खरीदना ही है। भारत बड़ी मात्रा में रूस से कच्चा तेल खरीदता है। अमेरिका का कहना है कि तेल की एवज में भारत जो पैसा रूस को देता है उसी से रूस यूक्रेन पर हमले कर रहा है। इसे ट्रंप का दोहरा चरित्र ही कहा जाएगा कि एक और रूस की आड़ लेकर भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाया जाता है, तो वहीं दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप रूस के सामने सरेंडर करते हैं।
दुनिया के अब यह समझ में आ गया है कि डोनाल्ड ट्रंप ताकतवर व्यक्ति से डरते हैं। ट्रंप भले ही अमेरिका के राष्ट्रपति हो लेकिन उनमें इतना दम नहीं कि वह रूस के राष्ट्रपति पुतिन के सामने सीना तान कर खड़े हो जाए। जहां तक भारत का सवाल है तो प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि ट्रंप की शर्तों के आगे झुकेंगे नहीं। भारत पहले ही तरह रूस से तेल की खरीद करता रहेगा।
यहां यह उल्लेखनीय है कि रूस के उत्पादन का 37 प्रतिशत तेल अकेला भारत खरीदता है। इसी प्रकार चीन रूस का 47 प्रतिशत तेल खरीद रहा है लेकिन ट्रंप चीन को कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। यूक्रेन को भी अब अमेरिका के भरोसे रूस के साथ युद्ध नहीं करना चाहिए। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को जल्द से जल्द युद्ध समाप्ति का निर्णय लेना चाहिए। जेलेंस्की जितना विलंब करेंगे उतना यूक्रेन को नुकसान होगा।
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